Thursday, 19 July 2018

जगदलपुर,चित्रकोट,तीरथगढ़ वॉटरफॉल

हेलो दोस्तो हम अभी दंतेवाड़ा से जगदलपुर बस से जा रहे थे।रास्ते मे हमें बहुत ही सुन्दर नजारा नजर आ रहे थे।हम लोग इस लिए ही मानसून के मौसम में कोई न कोई जगह हर बार जाते है । क्योकि बारिश में जो नजारे दिखाई देता है वो कोई और मौसम में नही दिखी देते।बचपन मे पढ़ी महादेवी वर्मा की कविताएं याद आ जाती हैं।यहाँ  का नज़ारा कुछ इसी प्रकार का था कि बारिश के कारण जंगल से कोहरा उठ रहा था मानो जंगल मे बदल उत्तर आये हो । हम सुबह 10 बजे जगदलपयर पहुच गए।
पर यह भी आके पता चला कि यहाँ से भी कोई ज्यादा सुविधा नही है चित्रकोट जाने के लिए । क्योकि हम सिर्फ दो लोग ही थे मैं और भाई जान(रविन्द्र) तो हमारे लिए गाड़ी बुक करना थोड़ा महंगा पड़ जाता लेकिन घूमना तो है फिर हमने ऑटो रिक्शा वाले को जाने को बोला वो 1200 में चित्रकोट और तीरथगढ़ वॉटरफॉल दिखाने के लिए मान गया। पहले तो वो 1500 बोल रहा था पर बाद में वो मान गया।यहाँ से चित्रकोट की दूरी40 किमी के करीब है ।यहाँ जाने में 1 घंटे का वक़्त लगता है। यह पहुचते ही हमे पता चला कि यह बोटिंग बंद है क्योकि अभी पानी का लेवल बहुत ही ज्यादा है । मुझे थोड़ा अच्छा नही लगा क्योंकि मैं बोटिंग के मूड से आया था । पर मेरा मूड वॉटरफॉल को देखकर फिर मस्त हो गया क्योंकि वॉटरफॉल का नज़ारा बहुत ही बढ़िया था पानी पूरी तरह से फुल था ।तो फिर क्या हम लग गए अपने काम मे वॉटरफॉल की बहुत सी पिक्स निकली कुछ पिक्स नीचे है।


                             महादेव मंदिर
                           
यहाँ रहने के लिए छत्तीसगढ़ govrment के द्वारा रिसोर्ट भी बनाया गया है जिसको छत्तीसगढ़ gov के वेबसाइट से बुक करा सकते है। कुछ देर यहाँ घूमने के बाद हम अपने अगले पड़ाव तीर्थगढ़ की ओर बढ़ गए। और हॉ एक बात तो आपको बताना भूल ही गया कही भी आप टूर में जा रहे हो तो आपको वहाँ का लोकल फ़ूड पता कर लेना चाहिए ये बात में इसलिए बोल रहा हूँ क्योंकि अगर आप south के तरफ यात्रा कर रहे हो और आप वह जाकर रोटी सब्जी की डिमांड करेंगे । तो आपको रोटी तो मिल जाएगी पर वो महंगी होगी और टेस्ट में भी उतनी अच्छी नही
नही होगी। तो आप वहाँ की लोकल डिश ही खाये । सस्ती और अच्छी । ये तो गई खाने की बात हम अभी तीरथगढ़ के लिए अपनी उड़नतश्तरी ऑटो से निकल चुके थे ऑटो की यात्रा में अपने एक्सपीरियंस से कभी भी नही करने को बोलूंगा क्योंकि रास्ता ज्यादा अच्छी नही है। रास्ते मे बहुत से गड्ढे है। यह रास्ते मे हमे कांगेरवेल्ली नेशनल पार्क भी पड़ता है यहाँ से ही हमें तीरथगढ़ के एंट्री के लिए चालान काटने पड़ता है। कांगेर वैली नेशनल पार्क जुलाई से octuber तक बंद रहता है । यहाँ जाने के लिए आप अपना वाहन वहां नही लेकर जा सकते है। यहाँ जाने के लिए वन विभाग के द्वारा जिप्सी बुक कराना पड़ता है जिसका चर्ज़े 1500 होता है। हम यह से जंगल के मज़े लेते हुए तीरथगढ़ पहुचे। यहाँ खाने के लिए होटल है जो कि चावल दाल सब्जी खिलाते हैं । तीरथगढ़ वॉटरफॉल मेरे सोच से भी ज्यादा सुन्दर निकला में इसकी सुंदरता को देखते ही राह गया। मन कर रहा था कि ये नाज़रा कभी आखो से ओझल ना हो पाए ।ये झरना100फ़ीट के ऊपर से पानी पत्थरो पर गिरता है जो कि बहुत ही सुंदर प्रतीत होता है क्योंकि ये सीधे 100 फ़ीट नीचे न गिर कर ये पत्थरो से होकर गिरता है यह दृश्य बहुत ही सुंदर होता है। यहाँ के कुछ फोटू में नीचे डाल देता हूँ। पिक्स में ये नार्मल झरने के जैसे ही दिखता ह पर आंखों से लगता है कि कोई ऐसा दृस्य है जिसको में कभी भी आंखों के सामने से ओझल नही होने नहीं दू।









अब हमारा अगला पड़ाव जगदलपुर रेल्वेस्टेशन है। वहाँ से हम विशाखापट्नम के लिए हमारा ट्रैन है।साम में करीब 6 बजे हम लोग जगदलपुर पहुच गए ।7:30 पर हमारी ट्रेन थी। हमने आस पास से खाना खाया और ट्रेन पकड़ लिया।आगे के व्लोग में हम विशाखापट्नम यात्रा के बारे में बतााऊंगा।
जय भोले बाबा।।।

Wednesday, 18 July 2018

दंतेवाड़ा

        दंतेवाड़ा

हेलो दोस्तो हम लोगसुबह 3 बजे दंतेवाड़ा पहुँच गए।यहाँ हम माँ दंतेश्वरी देवी मंदिर का दर्शन करने के लिए आये है। सुबह का समय था यहाँ कोई भी लॉज या धर्मशाला नही खुला था। किसी से पूछा तो बोलै की सुबह 5 बजे खुलेगा।अभी हमारे पास दो घंटे का टाइम था।हम  पैदल ही दंतेवाड़ा के सड़को पर धूमने लगे । मुंझे ये शहर बहुत ही अच्छा लगा साफ सुथरी सड़कें ,डंकिनीनदी का ब्रिज ,दंतेश्वरी माता का मंदिर सबसेसुंदर जगह मुझे लगा। सुबह6बजे धर्मशाला का दरवाजा खोला गया हूं वह जेक फ्रेश होकर नाहा कर दन्तेश्वरी देवी केदर्शन करने पहुच गए। साउथ के अधिकतर मंदिरो में बहुत ही ज्यादा भीड़ होती है, बहुत सी पाबंदिया भी होती है, जैसे कि मोबाइल अंदर नाइ लेके जाना है ।ज्यादा देर तक नही रुक सकते ।पर यहाँ कोई रोक टोक नही है में और मेरा दोस्त रविन्द्र  ने खूब सारी पिक्स यहाँ की ली और बहुत हि आराम से माता के दर्शन किये। बारिश का मौसम है तो यहाँ सुबह से ही रिमझिम बारिश हो रही थी । पर ये बारिश हमारा रास्ता कहा रोक पाएगी। यहाँ देखने लायक बहुत सी जगह है पर हम लोग यह सिर्फ माता के दर्शन करने आये थे । सुबह का 7 बज रहा था और हम माता के दरबार में थे, औऱ एक बात यहाँ मंदिर में प्रवेश करने के लिए पैंट, पजामा, allowed नही है। यह मंदिर ट्रस्ट द्वारा धोती दिया जाता है जिसको ही पहन कर मंदिर में प्रवेश दिया जाता है।यह और भी बहुत सारी पराचीन मंदिरे एवं मूर्तियां भी है। यह कि मंदिर का खास बात ये ह की मंदिर पूरा लकड़ीयो का बना हुआ है।यहाँ के पुजारी भी किसी को किसी भी प्रकार के चढ़ावे के लिए फ़ोर्से नही करते है। मंदिर के सामने से बहने वाली डंकनी नदी इसकी सुंदरता को चार चांद लगती है। मुझे यहाँ का वातावरण एवं ये शहर बहुत ही प्यार लगा। ये मेरे माइंड के परमानेंट यादें स्टोर करने वाला पार्ट में स्टोर हो गया है। मंदिर के बाहर में रोड के पास पेड़ो पर बहुत सारि चिड़ियों की चहचहाहट मन को बहुत ही संतोष प्रदान करने वाला पल था। यहाँ एक नेकी की दीवार है जहाँ कोई भी व्यक्ति अपने काम मे न आने वाले कपड़ो को यह लटका जाता है और कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति  यहाँ से लेकर जा सकता है। हमें यहाँऔर रुकने का मन था पर हमें आगे भी जाना था । यहाँ पता करने पर पता चल की तीरथगढ़ और चित्रकोट वॉटरफॉल जाने के लिए यहाँ से बस समय समय पर एक या दो ही है। तो हमने यहाँ से सीधे जगदलपुर जाने का सोचा । यह से जगदलपुर करीब75 किमी पर है।यहाँ से बस का किराया 80रुपये है।तो हम जगदलपुर पहुच गए। और हॉ यहाँ की फ़ोटो भी हमने बहुत सारी निकली है। जो कि नीचे है।अगले व्लोग में हम जगदलपुर,चित्रकोट,तीरथगढ़ वॉटरफॉल केे यात्रा बारे में बात करेंगे।

                                  शिवजी की मूर्ति
                                 विष्णु जी की मूर्ति
                                     मंदिर के अंदर
                                        माँ दन्तेस्वरी मंदिर

                                   रविन्द्र भाई रिवर व्यू
                                मंदिर द्वार
                             रोड से व्यू



Tuesday, 17 July 2018

मानसून टूर (दंतेवाड़ा, चित्रकोट वॉटरफॉल, तीरथगढ़ वॉटरफॉल,जगदलपुर, विशाखापट्नम,सिम्हाचलं)

हेलो दोस्तो।। ये मेरा पहला व्लोग है। इसमें में आप लोगो को मेरे पर्सनल एक्सपीरियंस बताऊंगा, की मेरे द्वारा किये गए यात्रा का हरेक पड़ाव और आप यहाँ कैसे पहुच सकते है यहाँ कहा कहा घूमने लायक जगह है और आप के पास बजेट का प्रॉब्लम भी है तो आप कम बजट में कैसे घूम सकते है।





यात्रा की तैयारी

अगर आप दोस्तो के साथ या अकेले टूर का प्लान बनाये हो तो आपको इस बात का घ्यान रखना पड़ेगा कि आपका बेग और आपके बैग का सामान काम से कम और 100% जरूरत का सामान हो कोई भी फालतू का सामान आपके बैग और टूर को लंबा और थकावट भरा बना सकता है। आपको मौसम के अनुसार कपड़े और जिस जगह आप घूमने जा रहे हो वह की व्हेथेर की जानकारी आपको जरूर पता कर लेनी चाहिए। अपने बैग में जितनी जरूरत है उतने ही कपड़े रखी चाहिए।

यात्रा

हमारे यात्रा की शुरुवात हमे हिमे टाउन जांजगीर से हुआ यहाँ से हम लोग रायपुर तक ट्रेन मर सफर किये।रायपुर पहुच कर हम लोग पांडरी बस स्टैंड से दंतेवाड़ा कर लिए बस लिया । यह से दंतेवाड़ा जाने के लिए 460 रुपये और जगदलपुर के लिए 330 किराया लगाता है। हमारा बस साम में 5 बजे था। अभी 2 बजे थे सोच थोड़ा shopping कर लिया जाए पास में पांडरी कपड़ा मार्किट है। हमने बस में नार्मल सीट लिया था बस में स्लीपर सीट भी था पर नोरनल सीट में भी बहुत comfortable था। हमारा बस सही टाइम पे छूट गया और हम लोग दंतेवाडा के लियर रवाना हो गए। हमारे रास्ते मे धमतरी,कांकेर,केशकाल, कोंडागाँव, बस्तर, जगदलपुर होते हुए दंतेवाड़ा पहुच गए। जब हम दंतेवाड़ा पहुचे तो सुबह के 3 बजे थे।आगे की यात्रा next दंतेवाड़ा व्लोग में।